blogid : 2606 postid : 1337574

भागलपुर दंगे के मुख्य आरोपी कामेश्वर को कोर्ट से मिली मुक्ति

Posted On: 29 Jun, 2017 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

सिल्क सिटी दो कारणों से बदनाम हुआ। पहली घटना आंखफोड़वा कांड की थी और दूसरी घटना भागलपुर दंगा से संबंधित था। आज भी दोनों घटनाओं को याद कर शहर के लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते है। दुर्भाग्यवश दोनों घटनाएं कांग्रेस के शासनकाल में हुई।आंखफोड़वा कांड आपातकाल के समय हुआ था। इस घटना को लेकर भी भागलपुर वल्र्ड मीडिया में छाया रहा। इसके भी किस्से अजब-गजब के है। फिर दंगे की घटना ने तो यहां के आर्थिक भूगोल को ही बिगाड़ कर रख दिया था। हालत यह थी कि कोई भी बेहतर पुलिस अधिकारी यहां अपनी पोस्टिंग के लिए तैयार नहीं होता था। दंगा आयोग की दो रिपोर्ट समाने आई। इस रिपोर्ट में जो सुझाव दिए गए उस पर आज तक बेहतर तरीके से काम नहीं किया गया। आज भी छोटी -मोटी घटनाओं को लेकर शहर का माहौल तनावग्रस्त हो जाता है। जरूरत है ईमानदार प्रयास की।
भागलपुर में 24 अक्टूबर 1989 में मंदिर के लिए ईंट इक_ा कर रहे एक जुलूस पर बम फेंका गया था। इसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इस घटना के बाद भागलपुर शहर और आस-पास के इलाकों में दंगे भड़क गए थे। इन दंगों की वजह से 50 हजार से ज्यादा लोगों को बेघर होना पड़ा था। मृतकों को भी कोई प्रमाणिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। हालांकि, बम किसने फेंका, ये आजतक रहस्य बना हुआ है। 1995 में एक जांच कमेटी ने भी माना कि बम फेंकने वाले मुस्लिम भी हो सकते हैं या फिर हिंदू भी। कई लोगों के मुताबिक ये आपराधिक तत्वों की हरकत थी। यह भी कहा जाता है कि उस समय अफवाहों का बाजार काफी गर्म था। दंगों के ज्यादा फैलने के पीछे अफवाहें ही थीं। भागलपुर में 1989 से पहले भी कई दंगे हुए थे। 1946 और 1966 में भी दंगे भड़क उठे थे। तब पुलिस के साथ जिला प्रशासन ने महज कुछ घंटों में दंगों पर काबू पा लिया था। प्रसाशनिक ढील की वजह से 1989 में हुआ दंगा बेकाबू हो गया था। वैसे 1986 से ही यहां हिंदू-मुस्लिम तनाव बढऩे लगा था। 80 के दशक में यहां कट्टर धार्मिक विचारधारा के कुछ दल काफी सक्रिय हो गए थे। उनके आने के साथ ही यहां छिट-पुट कम्युनल वायलेंस की शुरुआत हो गई थी। इसमें कांग्रेसी नेताओं के बीच बढ़ती दूरी ने आग में घी का काम किया। तब के सीएम भागवत झा आजाद के फैसले से कोल माफिया भी नाराज थे। वे अंदर ही अंदर यहां के असामाजिक तत्वों को हवा दे रहे थे। दंगे फैलने की एक वजह अफवाह भी रही। खास के संस्कृत कॉलेज की कुएं में सैंकड़ों छात्रों की लाश मिलने की खबर ने दंगे की आग को गांव गांव तक फैला दिया। इस पर सियासत भी खूब किया गया। यहां कांग्रेस के नेता स्वर्गीय राजीव गांधी को आना पड़ा। इस शहर को सेना के हवाले कर दिया। शहर की कमान सेना के प्रमुख मेजर ब्रिक को सौंपी गई। सेना और पुलिस के बीच भी तालमेल कायम कर पाना कठिन हो रहा था। सेना के एक अधिकारी की शिकायत पर ही एक डीआइजी को यहां से हटा तुरंत हटा दिया गया। इस दंगे को लेकर राजनीति भी खूब हुई। भावगत झा आजाद की कुर्सी चली गई। राजद को भी इस घटना का राजनीतिक लाभ मिला। इस घटना के मुख्य आरोपी कामेश्वर यादव को बनाया गया। पर हाईकोर्ट के फैसले ने यह साबित कर दिया कि कामेश्वर यादव के खिलाफ पुलिस कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सकी।
पटना हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए भागलपुर दंगा कांड के मुख्य आरोपित कामेश्वर प्रसाद यादव को निर्दोष मानते हुए उम्र कैद की सजा से मुक्त कर दिया। हाईकोर्ट ने भागलपुर पुलिस प्रशासन को सजायाफ्ता को तुरंत जेल से मुक्त करने का निर्णय सुनाया। वे विगत दस साल से भागलपुर की जेल में बंद थे। इस घटना ने भागलपुर के इतिहास को कलंकित कर दिया।

यह है घटनाक्रम
23 अक्टूबर 1989- भागलपुर में दंगा भड़का, जिसमें दो समुदाय के सैकड़ों लोग मारे गए ।
7 फरवरी 1990- लगभग चार महीने के बाद अभियुक्त पर दर्ज हुई प्राथमिकी
31 मार्च 1990 – पुलिस ने फाइनल फॉर्म प्रस्तुत किया।
24 जून 2005- सीजेएम ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत फाइनल फॉर्म को स्वीकार कर लिया।
25 जून 2006 – राज्य सरकार के आदेश से दोबारा केस खुला
30 सितंबर 2006 को पुलिस ने आरोप पत्र दायर किया।
6 नवंबर 2009- अभियुक्त को निचली अदालत से उम्र कैद की सजा
3 सितंबर 2015- हाईकोर्ट के दो जजों के बीच फैसले को लेकर मतांतर
25 मई 2015- तीसरे जज की अदालत में फैसला सुरक्षित



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran