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बिहार में पुलिस को हिम्मत ऐप लांच करने की हिम्मत नहीं

Posted On: 23 Sep, 2017 में

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राज्य में आए दिन महिलाओं को साथ छेड़खानी की घटनाएं होती ही रहती हैं। निर्भया कांड के बाद इस सवाल को लेकर बहस हुई थी। नेताओं और अफसरों ने महिला सुरक्षा को लेकर बड़ी-बड़ी बातें कही थी। लेकिन अब तक बिहार में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कोई कारगर ऐप नहीं तैयार किया गया। परिणामस्वरूप, छेड़खानी की घटनाओं में कोई कमी नहीं आई। सच तो यह है कि न तो सरकार और न ही पुलिस के बड़े अधिकारियों को इस बात की कोई चिंता है। unsafe women in biharजब भी महिलाओं के साथ यौन हिंसा की कोई घटना राष्ट्रीय या राज्य स्तर पर सुर्खियों में आती हैं तो हमारे राजनीतिज्ञ व पुलिस अधिकारी घूम-घूमकर महिलाओं को ही दोषी ठहराने लगाते हैं। जबकि स्थिति इसके विपरीत होती है। महिलाएं जब घर से निकलती हैं तो शिकारी निगाहें उन्हें घूरते रहती हैं। वह स्वयं को असुरक्षित महसूस करती हैं।
निर्भया कांड के बाद देश की राजधानी दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठाए गए। सरकार और पुलिस प्रशासन को कोई ठोस उत्तर नहीं मिल रहा था। काफी विमर्श के बाद महिलाओं को सुरक्षित रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने हिम्मत ऐप लांच किया। यह मोबाइल ऐप है। इसे केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने लांच किया। इसका नाम हिम्मत ऐप दिया गया। इसके लिए महिलाओं के पास एंड्रायड फोन होना आवश्यक है। ऐप खासकर कामकाजी महिलाओं के लिए बनाया गया। इससे पावर बटन दबा कर अलर्ट भेजा जा सकता है। इसके सुखद परिणाम भी मिले है। दिल्ली पुलिस की इस अनूठी पहल का महिलाओं ने स्वागत भी किया है।
लेकिन हिम्मत ऐप के मामले में बिहार पुलिस का हिम्मत जबाव दे गया। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कोई कारगर पहल बिहार पुलिस के स्तर से अब तक नहीं की गई। यही कारण है कि लगभग हर दिन बलात्कार या छेड़खानी की शिकार दर्जनों लड़कियां या महिलाएं होती हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वरीय पुलिस अधिकारियों की बैठक आयोजित कर राज्य में बढ़ते अपराध के मामले में चिंता जताई थी। उन्होंने जिले में तैनात पुलिस कप्तानों को बढ़ते अपराध को रोकने के लिए थाने जाने की हिदायत दी थी। लेकिन हाकिमों को यहां फुर्सत कहां की वे लोगों की पीड़ा जानने के लिए थाने जाएं। पहले के पुलिस अधिकारी यह कहते थे कि सौ चोर छूट जाए तो कोई बात नहीं। एक दरोगा नहीं छूटना चाहिए। इसका साफ मतलब था कि यदि दरोगा नियंत्रित रहेगा तो अपराध खुद व खुद पकड़े जाएंगे। लेकिन फिलवक्त व्यवस्था इसके उलट है। बिहार में दरोगा राज कायम है। सरकार भले ही महिलाओं की हित की बात करें पर हिम्मत ऐप को लेकर राज्य सरकार का हिम्मत जवाब दे गया। यहीं कारण है कि पूरे प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस स्तर पर कोई कारगर प्रबंध अब तक नहीं हो सका है।



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